कुल मिलाकर ‘नैप ब्रेक’ की कहानी सिरे से खारिज होती नजर आती है, क्योंकि पीएम मोदी का पूरा कार्यक्रम सार्वजनिक रूप से सबके सामने है। वैसे भी सवाल यह उठता है कि अगर किसी बड़े नेता के व्यस्त विदेश दौरे के कार्यक्रम में कुछ आराम का समय शामिल भी हो, तो क्या यह वाकई कोई बड़ी खबर बनती है।
गौरतलब है कि किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह 40 साल में पहली न्यूजीलैंड यात्रा थी। हालांकि यह दौरा ऐसे समय हुआ जब न्यूजीलैंड में भारत विरोधी भावनाएं बढ़ती दिख रही हैं, और विंस्टन पीटर्स जैसे नेता खासतौर पर भारतीयों को लेकर सख्त प्रवासन नीति की वकालत करते रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी को उनकी कड़ी कार्यशैली के लिए जाना जाता है, वे अक्सर 40 डिग्री की भीषण गर्मी में भी भाजपा के लिए चुनावी प्रचार करते नजर आते हैं।
राजनीतिक टिप्पणीकार और उद्यमी राम प्रसाद ने इस पूरे मामले पर तंज कसते हुए एक्स पर लिखा कि मोदी को बार-बार झपकी की जरूरत पड़ने की बात गढ़ी हुई लगती है, क्योंकि वे अक्सर विदेश यात्रा से लौटते ही सीधे किसी राजनीतिक रैली में पहुंच जाते हैं, और जब बाकी तर्क काम नहीं आते तो उम्र को ही मुद्दा बना दिया जाता है।
इस तरह भारत द्वारा पीएम मोदी के लिए कथित रूप से ‘नैप ब्रेक’ मांगे जाने की यह पूरी कहानी अपने आप में एक अजीब सा विवाद बनकर उभरी, जिसकी हकीकत उनके खुद के व्यस्त कार्यक्रम ने ही उजागर कर दी।