नई दिल्ली। भारत ने Foreign Contribution Regulation Act (FCRA) में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर अमेरिकी सांसद की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि FCRA में बदलाव भारत का आंतरिक मामला है और इससे जुड़े निर्णय देश के कानूनों और प्रक्रियाओं के तहत लिए जाते हैं।
अमेरिकी सांसद की ओर से FCRA में बदलाव को लेकर भारत में चर्चों के कथित अधिग्रहण से जोड़कर सवाल उठाए गए थे। इस पर विदेश मंत्रालय ने ऐसे दावों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि भारत अपने घरेलू कानूनों और नीतियों से जुड़े मामलों पर स्वयं निर्णय लेने में सक्षम है।
FCRA के तहत भारत में विदेशी फंड प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए नियम निर्धारित किए जाते हैं। सरकार का तर्क रहा है कि विदेशी योगदान से जुड़े नियमों का उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना और यह देखना है कि विदेशी धन का इस्तेमाल निर्धारित कानूनी उद्देश्यों के अनुरूप हो।
MEA की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब भारत-अमेरिका संबंधों के बीच विदेशी फंडिंग और धार्मिक संगठनों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज हुई है। भारत ने संकेत दिया है कि घरेलू कानूनों में सुधार या संशोधन को लेकर बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।