नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A हटाए जाने के आज 7 वर्ष पूरे हो गए। 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था और राज्य का पुनर्गठन कर इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित कर दिया था।
केंद्र सरकार का दावा है कि पिछले सात वर्षों में जम्मू-कश्मीर में विकास परियोजनाओं को गति मिली है, बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ है, निवेश बढ़ा है और पर्यटन ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। सरकार का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था में भी सुधार हुआ है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं।
हालांकि, विपक्षी दल और कुछ क्षेत्रीय राजनीतिक दल इस फैसले पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य का पूर्ण दर्जा बहाल किया जाना चाहिए और स्थानीय राजनीतिक अधिकारों को मजबूत किया जाए।
दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 हटाने के केंद्र सरकार के फैसले को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया था। साथ ही केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने और राज्य का दर्जा बहाल करने की दिशा में कदम उठाने की भी बात कही थी।
अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला भारतीय राजनीति के सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक निर्णयों में से एक माना जाता है, जिस पर आज भी देशभर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा जारी है।