कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की अस्मिता डे ने महिला 48 किलोग्राम जूडो वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। ग्लासगो में खेले गए फाइनल मुकाबले में उन्होंने कनाडा की हैदी कवच को हराकर कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनने का गौरव हासिल किया।
उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत अस्मिता डे की सफलता संघर्ष और समर्पण की मिसाल है। त्रिपुरा के एक छोटे से गांव से आने वाली अस्मिता के पिता साइकिल मैकेनिक थे और प्रतिदिन लगभग 300 रुपये कमाते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बेटी के सपनों को कभी रुकने नहीं दिया।
सात महीने पहले पिता के निधन के बाद अस्मिता गहरे सदमे में थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने एशियन गेम्स ट्रायल्स में शानदार वापसी की और अब कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वर्ण जीतकर यह उपलब्धि अपने दिवंगत पिता और कोच को समर्पित की।
अस्मिता डे की यह सफलता न केवल भारतीय खेल जगत के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि उन लाखों परिवारों के लिए भी प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने बच्चों के सपनों को साकार करने का साहस रखते हैं।