करीब छह दिनों तक चले अघोषित युद्ध विराम के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। गुरुवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और हवाई हमले किए। अमेरिका का दावा है कि यह कार्रवाई हाल ही में जॉर्डन स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हुए ईरानी मिसाइल हमलों के जवाब में की गई है। वहीं ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कड़े जवाब की चेतावनी दी है।
मध्य पूर्व में बढ़ते इस सैन्य तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिसका सीधा प्रभाव भारत समेत दुनिया के शेयर बाजारों पर पड़ेगा। तेल आयात पर निर्भर देशों में महंगाई और परिवहन लागत बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, हालिया घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बना अस्थायी युद्ध विराम अब प्रभावी नहीं रहा। दोनों देशों की ओर से लगातार सैन्य कार्रवाई और तीखे बयान क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए नई चुनौती बन रहे हैं। यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।