रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने CGPSC-2021 परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक मामले में गिरफ्तार रिटायर्ड IAS अधिकारी एवं छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव को जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक का असर लाखों युवाओं के करियर और पूरे समाज पर पड़ता है, इसलिए इसे सामान्य अपराध नहीं माना जा सकता।
जस्टिस गुरु की पीठ ने जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पेपर लीक कराने या उसमें मदद करने वाला व्यक्ति उन लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करता है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों मेहनत करते हैं। कोर्ट ने कहा कि इसका प्रभाव केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बड़ी संख्या में युवाओं और पूरे समाज पर पड़ता है।
CGPSC Scam में क्या है आरोप?
CBI ने सितंबर 2025 में रिटायर्ड IAS अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव को CGPSC की 2021 परीक्षा में कथित गड़बड़ी और भाई-भतीजावाद के आरोपों की जांच के दौरान गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान उनके बेटे सुमित ध्रुव का चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ।
इस मामले में CGPSC के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को भी CBI ने गिरफ्तार किया था।
CBI की चार्जशीट के मुताबिक, ध्रुव के घर से बरामद एक प्रश्न पुस्तिका में मौजूद 42 सवाल CGPSC-2021 मेन्स परीक्षा के पेपर नंबर-7 से मेल खाते पाए गए। जांच एजेंसी ने इसे परीक्षा में कथित गड़बड़ी से जोड़ते हुए आरोप लगाए हैं।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि आरोप सामान्य प्रकृति के नहीं हैं और ऐसे मामलों में कानून के तहत कड़ी दृष्टि से विचार किया जाना जरूरी है।